केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को इथेनॉलमिश्रित पेट्रोल (ई-20) नीति का जोरदार बचाव करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया

 केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को इथेनॉलमिश्रित पेट्रोल (ई-20) नीति का जोरदार बचाव करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया।



गडकरी ने कहा कि इथेनॉल नीति से उन्हें कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं होता और यह योजना देश में पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है।


गडकरी ने कहा, 'मुझे इथेनॉल नीति से कोई लाभ नहीं मिलता। इथेनॉल उत्पादन में मेरी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है। इतनी कम हिस्सेदारी से किसी बड़े आर्थिक लाभ की संभावना नहीं है।'


केंद्रीय मंत्री ने उन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया कि उन्होंने निजी लाभ के लिए इथेनॉल नीति बनाई। गडकरी ने कहा कि देश की इथेनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं है, बल्कि इसे पेट्रोलियम मंत्रालय, कैबिनेट और वैज्ञानिक विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करने के बाद तैयार किया गया है।


ई-20 ईंधन से वाहनों को नुकसान पहुंचने के आरोपों पर गडकरी ने आलोचकों से सुबूत पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हुआ है तो ग्राहक डीलर और उनके मंत्रालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।


उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे व्यक्तिगत रूप से जानते हों और जिसकी पेट्रोल गाड़ी इथेनॉल के कारण खराब हुई हो।


गडकरी ने कहा कि मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियों ने इथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहन खराब होने की कोई शिकायत नहीं दी है।


टोयोटा वाहन से जुड़े हालिया मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जांच में समस्या का कारण इथेनॉल नहीं, बल्कि पानी का मिलना पाया गया था।


गडकरी ने कहा कि वाहन कंपनियां चार साल तक परीक्षण और लाखों किलोमीटर की जांच के बाद ही ईंधन संबंधी मंजूरी देती हैं। गडकरी ने पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि उनके और इथेनॉलकार्यक्रम को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, थाईलैंड और स्वीडन जैसे देशों में भी इथेनॉलमिश्रित ईंधन का इस्तेमाल होता है।


हालांकि, ई-20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों और कुछ विशेषज्ञों में ईंधन दक्षता और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। सरकार का कहना है कि अभी तक ई20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।


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(Source: jagran news)

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