मध्य प्रदेश में करीब 35 हजार शिक्षकों की पदोन्नति का मामला उलझ गया

 मध्य प्रदेश में करीब 35 हजार शिक्षकों की पदोन्नति का मामला उलझ गया है। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता के कारण प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर शिक्षा विभाग के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से यह कानूनी स्थिति मजबूत हुई है कि पदोन्नति के लिए भी संबंधित शिक्षक के पास TET/CTET की योग्यता होना जरूरी है। अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने के समय आवश्यक TET योग्यता पूरी होनी चाहिए। 


सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदली स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इन-सर्विस शिक्षकों के संबंध में TET की अनिवार्यता को बरकरार रखा। हालांकि सेवा में बने रहने के लिए पात्र शिक्षकों को TET हासिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई है। कोर्ट ने राज्यों से TET नियमित रूप से और संभव हो तो साल में दो बार आयोजित करने का भी प्रयास करने को कहा है। 

लेकिन पदोन्नति के मामले में स्थिति अलग है। न्यायिक व्याख्या के अनुसार प्रमोशन के लिए TET योग्यता पहले से पूरी होना जरूरी है; सेवा जारी रखने के लिए दी गई अतिरिक्त समय-सीमा को प्रमोशन की पात्रता के रूप में नहीं देखा जा सकता। 

हजारों शिक्षकों को अब फैसले का इंतजार

ऐसे में मध्य प्रदेश में लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि स्कूल शिक्षा विभाग TET की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए प्रमोशन प्रक्रिया पर क्या निर्णय लेता है और प्रभावित शिक्षकों के लिए किस तरह की व्यवस्था बनाई जाती है।


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