बलूचिस्तान के राष्ट्रवादियों और स्व-घोषित समूहों द्वारा पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र ('रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान') की मांग लंबे समय से की जा रही है और
बलूचिस्तान के राष्ट्रवादियों और स्व-घोषित समूहों द्वारा पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र ('रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान') की मांग लंबे समय से की जा रही है और हाल ही में 11 अगस्त को अपना 'स्वतंत्रता दिवस' घोषित करने की घोषणा भी की गई है।
इस मांग और वर्तमान स्थिति से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ऐतिहासिक संदर्भ: बलूच राष्ट्रवादियों का मानना है कि 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी, जिसे मार्च 1948 में पाकिस्तान द्वारा बलपूर्वक मिला लिया गया था। इस विलय को बलूच नेता अवैध मानते हैं।
- संसाधनों की उपेक्षा: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस, तांबा और सोना) का दोहन करती है, लेकिन स्थानीय आबादी गरीब और पिछड़ी हुई है।
- स्वतंत्रता का दावा और अपील: हाल ही में स्व-घोषित 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है तथा बलूच नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता का अभाव: इन घोषणाओं और प्रदर्शनों के बावजूद, वर्तमान में किसी भी देश या संयुक्त राष्ट्र ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और आधिकारिक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान इस क्षेत्र को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि वहां बलूच मुक्ति सेना (BLA) जैसे सशस्त्र संगठन भी सक्रिय हैं।
- (Credit: chhavinews24 & Google)

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